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अमूल्य क्यों
अमूल्य की हर साड़ी मैंने ख़ुद घूमकर, ढूँढकर, हाथ में लेकर, छूकर और तब चुनी है — बनारस की तंग गलियों से येवला के जीवंत करघों तक, महाराष्ट्र के अनमोल हथकरघा केंद्रों से लेकर हमारी वस्त्र-विरासत को ज़िंदा रखने वाले देश भर के कारीगरों तक।
ये साड़ियाँ गट्ठे में ख़रीदी हुई नहीं हैं — ये अमृता की ख़ुद चुनी हुई हैं; बारीकी से, अंतर्ज्ञान से और प्रेम से।
सुंदरता, विरासत और शालीनता को एक साथ लाने के लिए अमूल्य है — ताकि हर स्त्री ख़ुद को अमूल्य महसूस करे।
— अमृता
हमने चुनकर रखा है:
- शुद्ध हथकरघा साड़ियाँ
- शुद्ध रेशमी साड़ियाँ
- जामदानी
- मश्रू सिल्क
- मुनिया पैठणी
- ऑर्गेन्ज़ा
- शुद्ध सूती साड़ियाँ
- और ऐसी ही कितनी और अनोखी बुनाइयाँ और उनकी कहानियाँ…