पैठणी परंपरा
जिस बुनाई को पैठण ने नाम दिया — उन्हीं बुनकरों से जो आज भी चौख़ाने वाले काग़ज़ पर नक़्शा बनाते हैं।
बूटियाँ किसी किताब से नहीं आईं। पैठणी के पल्लू का कमल और हंस वही कमल और हंस हैं जो सौ किलोमीटर दूर अजंता की छत पर हैं।
धागा डालने से पहले नक़्शा बनता है: बूटी ख़ाने-दर-ख़ाने बिठाई जाती है, और फिर वे ख़ाने बुने जाते हैं। किनारे में दिन लगते हैं और पल्लू में महीने, वजह यही है।
१० साड़ियाँ
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मुनिया — मुनिया पैठणी
₹११,९००
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असावली — मुनिया पैठणी
₹१३,४००
बिक गई
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अजंता कमल — शुद्ध रेशमी पैठणी
₹१८,९००
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नारली — शुद्ध रेशमी पैठणी
₹९,९००
बिक गई
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तोता-मैना — मुनिया पैठणी
₹१२,४००
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कुयरी — ऑर्गेन्ज़ा
₹८,९००
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रुई फूल — शुद्ध हथकरघा रेशम
₹१०,९००
बिक गई
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गोल कमल — शुद्ध रेशमी पैठणी
₹१५,९००
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अनारबेल — मुनिया पैठणी
₹१४,४००
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तोताबेल — शुद्ध हथकरघा रेशम
₹११,४००